मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने बहरैन में शासन के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रदर्शन के हिंसक दमन पर अमरीका और उसके घटकों के मौन की कड़ी आलोचना की है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमन राइट्स वाच के मध्यपूर्व के उप निदेशक जो स्टार्क ने कहा कि बहरैन ने अधिक स्वतंत्रता व उत्तरदायित्व के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को बड़ी निर्ममता से दंडित किया और इस दौरान अमरीका और उसके घटक मौन धारण किए रहे। ह्यूमन राइट्स वाच ने कल जारी अपने बयान में बहरैन के आले ख़लीफ़ा शासन की हिंसक दमन की कार्यवाही पर कड़ी आलोचना की। बहरैन के मानवाधिकार केन्द्र के अनुसार इस समय बहरैन में चिकित्सा क्षेत्र के कर्मचारियों सहित एक हज़ार से अधिक राजनैतिक कार्यकर्ता जेलों में हैं।इस बीच बहरैन के सबसे बड़े विपक्षी धड़े अलविफ़ाक़ ने बल दिया है कि विपक्ष की आलेख़लीफ़ा शासन के साथ वर्तमान शैली में वार्ता का कोई परिणाम नहीं निकलेगा। जमील काज़िम ने कल अलआलम से विशेष साक्षात्कार में कहा कि जो कुछ बहरैन में वार्ता के नाम पर जारी है वह एक सेमिनार है जिसमें हर कोई अपना राग अलाप रहा है। उन्होंने बड़े विश्वास से कहा कि इस सेमिनार का इसकी वर्तमान शैली में कोई परिणाम नहीं निकलेगा। जमील काज़िम ने जो अलविफ़ाक की कार्यकारिणी के अध्यक्ष हैं, विभिन्न दलों को वार्ता के निमंत्रण के मेकनिज़्म के बारे में कहा कि अलविफ़ाक़ बहरैन का सबसे बड़ा राजनैतिक दल है इसके बावजूद उसके पांच सदस्यों को बहुत ही छोटे गुट या किसी भी गुट का प्रतिनिधित्व न करने वाले लोगों के साथ वार्ता में भागीदारी दी गयी। उन्होंने कहा कि अलविफ़ाक़ ने अपने दृष्टिकोण व मांगों को स्पष्ट रूप से पेश किया है और तैंतीस प्रश्न सामने रखे हैं जिसके सेमिनार के अध्यक्ष की ओर से उत्तर की प्रतीक्षा है।

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